वयस्क स्कोलियोसिस परिदृश्य

वयस्क स्कोलियोसिस का तात्पर्य है, अठारह वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति में पाया जाने वाला स्कोलियोसिस का कोई भी मामला। वयस्क स्कोलियोसिस के मरीज़ हड्डियों के विकास की दृष्टि से वयस्क होते हैं और उनके इलाज के आधार और इलाज के विकल्प, स्कोलियोसिस के बाल रोगियों से अलग होते हैं। वयस्क स्कोलियोसिस के रोगियों में कई तरह के व्यक्ति शामिल होते हैं जिनके रीढ़ की हड्डी की विकृति के कारण भी अलग-अलग होते हैं। इनमें अज्ञात कारणों से होने वाली स्कोलियोसिस (इडियोपैथिक स्कोलियोसिस) भी शामिल है, जिसका आरंभ बचपन में ही हो जाता है लेकिन दर्द और विकृति का बढ़ना बड़ी उम्र में होता है। अन्य कारणों में शामिल हैं, गर्भाशय में होने वाली जन्मजात असामान्यतायें, चक्रिका की छीजन के कारण होने वाली डीजेनेरेटिव स्कोलियोसिस, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्कोलियोसिस (जो रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर के फलस्वरूप होती है), और न्यूरो-मस्कुलर स्कोलियोसिस जो अक्सर पोलियो, पेशियों के अपविकास, या तंत्रिका और पेशियों के किसी अन्य रोग के मरीज़ों में देखी जाती है।

वयस्क और बाल मरीज़ों में यह अंतर होता है कि वयस्कों में रीढ़ की हड्डी के झुकाव के साथ पीठ का दर्द भी होता है जो अक्सर डॉक्टर के पास आने के समय मुख्य शिकायत होती है। वयस्कों में झुकाव भी गंभीर होता है और अक्सर बढ़ता जाता है। यही नहीं, वयस्कों में झुकाव बहुत अधिक कड़ा या कठोर होता है, जिसका इलाज करना, शल्य चिकित्सक के लिए एक चुनौती बन जाता है। अक्सर, वयस्क स्कोलियोसिस के साथ गंभीर स्तर का चक्रिका ह्रास भी जुड़ा होता है। कई रोगियों में यही पीठ के दर्द का प्रमुख कारण हो सकता है। चक्रिकाओं के नीचे आ जाने और जोड़ों में सूजन आने से जब तंत्रिकायें दबने लगती हैं तो उनके कारण उनकी संवेदनशीलता भी कम हो सकती है। प्रौढ़ और वृद्ध रोगियों में ऑस्टियोपीनिया (अस्थि घनत्व में कमी) या ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थि विरलीकरण में वृद्धि) की समस्यायें पाया जाना, आम बात है। वयस्क स्कोलियोसिस से पीड़ित रोगियों के इलाज में ये सभी बातें महत्त्वपूर्ण हैं।

वयस्क स्कोलियोसिस के अधिकतर रोगियों का इलाज ऑपरेशन से नहीं होता। मरीज़ की भली-भाँति जाँच करने के बाद, शल्यचिकित्सक को उसके दर्द के स्रोत का पता लग जाता है और वह उसकी विशिष्ट समस्या के लिए ऑपरेशन के अलावा, दूसरी तरह का उपचार कर सकता है। बिना ऑपरेशन वाले इलाज में अक्सर व्यायाम और शरीर को दुरुस्त बनाने पर ख़ास ध्यान दिया जाता है और इससे मरीज़ को अपने काम-काज करने और ऊर्जा का स्तर बनाये रखने और पीठ के दर्द पर क़ाबू पाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही कई मरीज़ों को फ़िज़िकल थेरेपी और पर्याप्त मात्रा में ग़ैर-स्टीरॉयड, सूजन कम करने वाली दवायें जैसे कि इबूप्रोफेन (मोट्रिन) [Ibuprofen (Motrin)] भी दी जाती हैं। रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (पीठ के निचले हिस्से) में नाड़ियों के दबाने के कारण होने वाले पैर के दर्द से राहत दिलाने में तंत्रिका-मूल को अवरुद्ध करने या इपिड्यूरल स्टीरॉयड इंजेक्शन से मदद मिल सकती है। ब्रेसिंग वयस्क मरीज़ों के लिए बहुत कम इस्तेमाल की जाती है लेकिन कभी-कभी किसी ऐसे बुज़ुर्ग मरीज़ को कुछ आराम देने की प्रयास में लगाई जा सकती है, जिसकी शल्यचिकित्सा नहीं की जा सकती। दुर्भाग्यवश, बुज़ुर्ग मरीज़ों को ब्रेसिंग अक्सर रास नहीं आती। हम अधेड़ उम्र के मरीज़ों की ब्रेसिंग से बचते हैं ताकि उन्हें ब्रेसिंग से जुड़ी पेशियों की शक्ति कम होने की समस्या कम से कम हो। ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया का इलाज भोजन में उपयुक्त परिवर्तन से किया जाता है जिसमें कैल्शियम और विटामिन डी की अतिरिक्त मात्रा लेना और व्यायाम करना शामिल है (ऑस्टियोपोरोसिस का रोगी संसाधन खंड देखें)।

शल्यचिकित्सा का सुझाव उन्हीं मरीज़ों को दिया जाता है जिनमें समय के साथ रीढ़ की हड्डी का झुकाव बहुत बढ़ गया हो, जिनके दर्द में ऑपरेशन के सिवा अन्य इलाजों से कोई कमी न आ रही हो, या जिनकी तकलीफ़ तंत्रिका-तंत्र की कमियों से संबंधित हो। सर्जरी की राय तब भी दी जाती है जब रीढ़ की हड्डी में विभिन्न स्तरों के लक्षणों के साथ, अस्वीकार्य, गंभीर विकृति आ चुकी हो। सर्जरी की राय उन बुज़ुर्ग मरीज़ों के लिए नहीं दी जाती जिनका स्वास्थ्य सर्जरी को बर्दाश्त करने लायक न हो या जिन्हें गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस हो, जिसकी वजह से वे सर्जरी बर्दाश्त न कर सकते हों। वयस्क मरीज़ों में लम्बर या थोरैकोलम्बर स्कोलियोसिस के लिए शल्यचिकित्सा पीछे से (पोस्टीरियर), आगे और पीछे से संयुक्त रूप से या फिर केवल आगे (एन्टीरियर) से की जा सकती है। अत्यधिक गंभीर विकृतियों में रीढ़ की हड्डी को यथासंभव सुरक्षित ढंग से दुरुस्त करने के लिए अक्सर व्यापक ऑस्टियोटॉमी (हड्डी को काटना), या वर्टिब्रल कॉलम रीसेक्शन किया जाता है, जिसमें पूरी कशेरूका हटा दी जाती है। अक्सर, निचले लम्बर क्षेत्र में कशेरुकाओं का गंभीर ह्रास हो चुका होता है, जिसमें त्रिकास्थि तक फ़्यूज़न करने की ज़रूरत पड़ती है। फ़्यूज़न को त्रिकास्थि तक लेजाना काफ़ी चुनौतीपूर्ण होता है और इसके लिए अक्सर आगे और पीछे से सर्जरी आवश्यक हो जाती है। मूत्र आदि को रोक सकने की क्षमता बढ़ाने के लिए श्रोणि को ठीक करने (पैल्विक फिक्सेशन) की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

वयस्क स्कोलियोसिस की सर्जरी के बाद स्वस्थ होने का समय अलग-अलग होता है और ऑपरेशन से पूर्व विकृति के प्रकार, आवश्यक सर्जरी की गंभीरता और मरीज़ की आयु पर निर्भर है। सर्जरी के बाद मरीज़ तीन महीने के अंदर अपनी पूरी गतिविधियाँ दोबारा कर सकते हैं, या इसमें छह से नौ महीने तक का भी समय लग सकता है। ऑपरेशन के समय अस्पताल में रहने के बाद कुछ समय किसी पुनर्वास केन्द्र (इनपेशेंट रीहैबिलीटेशन फैसीलिटी) में रहने से अक्सर मरीज़ों को लाभ होता है।

हमने देखा है कि स्कोलियोसिस की सर्जरी कराने वाले वयस्क रोगी हमारे मरीज़ों में सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं क्योंकि उनका दर्द दूर हो जाता है या उसमें काफ़ी कमी हो जाती है, उनकी विकृति दुरुस्त हो जाती है और वे सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

हमें अपने कार्यालय में आपकी व्यक्तिगत समस्या के बारे में आपसे बात करने की प्रतीक्षा रहती है।

मामले का उदाहरण #1

इस 26 वर्षीय व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में 82 डिग्री का दर्द भरा थोरैसिक झुकाव था। इसका इलाज थोरैकोस्कोपिक रिलीज़ (चक्रिका को हटाकर) और औज़ारों की मदद से, पीछे से संयोजन करके किया गया जिसके फलस्वरूप इसके संतुलन में उत्तम सुधार हुआ और दर्द से राहत मिली।

मामले का उदाहरण #2

इस 51 वर्षीय महिला ट्रायेएथलीट और डेंटल हाइजीन शिक्षिका को लगातार बढ़ने वाला लम्बर झुकाव था, जो इसे अशक्त कर रहा था। इसका इलाज आगे और पीछे से संयुक्त रूप से की गई सर्जरी से किया गया, जिसमें ऑस्टियोटॉमी भी शामिल थी, ताकि इसकी रीढ़ की हड्डी का संतुलन ठीक किया जा सके, दर्द में कमी हो और सामान्य गतिविधियाँ वापस लाई जा सकें। यह मरीज़ सर्जरी के कुछ ही महीनों के भीतर अपने काम और मनोरंजन की गतिविधियाँ फिर कर पाने में समर्थ हो गई। इसने अब अपनी साइकिल से 100 मील तक की दूरी तय की है और स्कीइंग भी करने लगी है। डॉ. लोनर ने इसे सलाह दी है कि दौड़ना जारी न रखे।

मामले का उदाहरण #3

यह 77 वर्षीय महिला गंभीर स्कोलियोसिस और काइफ़ोसिस से पीड़ित थी और इसकी पीठ में बहुत दर्द था। इसका इलाज आगे और पीछे से संयुक्त रूप से सर्जरी से किया गया, जिसमें श्रोणि को दुरुस्त करना भी शामिल था। वह बहुत अच्छी तरह है और बेहद संतुष्ट है। ध्यान देने की बात यह है कि, इस आयु वर्ग के कुछ रोगी, हो सकता है इतनी व्यापक शल्यचिकित्सा कराने लायक स्वस्थ न हों।

संबंधित लिंक्स


वयस्क ह्रासपरक स्कोलियोसिस (एडल्ट डिजेनेरेटिव स्कोलियोसिस )
किशोर इडियोपैथिक स्कोलियोसिस
Adult Scoliosis - English Language

Scoliosis Associates East 69th Street New York City