


CT मायलोग्रामCT स्कैनिंग को मायलोग्राफ़ी के साथ क्यों संयुक्त किया जाता है? कम्प्यूटरीकृत टॉमोग्राफ़ी (CT या CAT) स्कैन से रीढ़ की हड्डी की विभिन्न बीमारियों जैसे डिस्क हर्नियेशन, स्पाइनल स्टेनोसिस, ट्यूमर या कशेरुका के फ्रैक्चर का पता चलता है। स्कैन से शरीर के एक पक्ष का रेडियोग्राफिक चित्र मिल जाता है। कड़े टिश्यू जैसे कि हड्डियों की बनावट के चित्र लेने में यह पद्धति विशेष रूप से अच्छी है। इसका उपकरण आकार में एक मालपुए या अँगूठी जैसा होता है, जिसमें एक सचल टेबल-सी होती है जो इस छल्ले के दायरे के अंदर-बाहर आ-जा सकती है। स्कैनिंग प्रणाली में एक कम्प्यूटर भी शामिल होता है, जो शरीर के लक्षित भाग, जैसे कि रीढ़ की हड्डी के किसी ख़ास हिस्से के चित्र फाँकों या क्रॉस-सेक्शन के रूप में बनाता है। पारपंरिक एक्स-रे से इस तरह के चित्र खींचना संभव नहीं होता। मायलोग्राम (जिसे मायलोग्राफ़ी भी कहते हैं) एक निदान उपकरण है, जिसमें रेडियोग्राफ़िक कंट्रास्ट मीडिया (डाई) का प्रयोग किया जाता है। इस डाई को रीढ़ की हड्डी में मौजूद तरल पदार्थ (सेरेब्रोस्पाइनल फ़्लुइड, CSF) में इंजेक्ट किया जाता है। डाई इंजेक्ट किये जाने के बाद, यह कंट्रास्ट डाई चित्र लेते समय स्पाइनल कैनाल, कॉर्ड, और तंत्रिका-मूलों को प्रकाशित करती है। इस तरह, जब CT स्कैन और मायलोग्राफ़ी का संयुक्त रूप से उपयोग किया जाता है, तब उनसे जो चित्र मिलते हैं उनमें रीढ़ की हड्डी की बनावट और उसकी तंत्रिकाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाती है। ये चित्र चिकित्सकों के लिए बहुमूल्य होते हैं, क्योंकि इनसे मरीज़ की रीढ़ की हड्डी की समस्याओं का पता चलता है। मरीज़ को तैयार करना
ध्यान रखने योग्य बातें:
जाँच के दो हिस्से हैं: रीढ़ की हड्डी में कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट करना और तस्वीरें लेना। पहले, मरीज़ को पीठ के बल या करवट लेकर सचल टेबल पर लिटा दिया जाता है। यह टेबल CT स्कैनर के अंदर चली जाती है। इसके बाद, संक्रमण से बचाव के लिए त्वचा के हिस्से पर एंटीसेप्टिक लगाया जाता है। कंट्रास्ट डाई का इंजेक्शन लगाने से पहले शरीर के उस हिस्से को सुन्न करने के लिए लोकल एनीस्थेटिक का इंजेक्शन दिया जाता है। कंट्रास्ट डाई के इंजेक्शन को कभी-कभी सर्वाइकल या लम्बर ‘पंक्चर’ या ‘स्पाइनल टैप’ भी कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो थोड़ा सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) निकाला जाता है और उसकी जगह उतनी ही मात्रा में कंट्रास्ट डाई पहुँचा दी जाती है। ‘पंक्चर’ शुरू करने से पहले, मरीज़ के शरीर को सही स्थिति में रखा जाता है। सर्वाइकल पंक्चर लम्बर पंक्चर फ्लूरोस्कोपिक गाइडेंस (चित्र खींचने की एक आधुनिक पद्धति) के तहत सुई को, एक या दो पंक्चर या टैप साइट के ज़रिये स्पाइनल कैनाल तक पहुँचाया जाता है। फ्लूरोस्कॉपी का प्रयोग कंट्रास्ट डाई के इंजेक्शन पर नज़र रखने और उसके CSF के भीतर-भीतर तंत्रिका मूलों और सुषुम्ना के आसपास पहुँचने की क्रिया को देखने के लिए भी किया जाता है। रेडियोलॉजी तकनीशियन कंट्रास्ट डाई को वांछित स्थानों तक पहुँचाने के लिये सचल टेबल को झुका सकता है। CT स्कैन के दौरान रीढ़ की हड्डी का प्रत्येक चित्र लेते समय मरीज़ों से कुछ देर के लिए हिलना-डुलना बंद करने और साँस खींचकर रखने को कहा जाता है। जाँच प्रक्रिया के बाद
मायलोग्राफ़ी से जुड़े जोखिम सरदर्द तब हो सकता है जब रीढ़ की हड्डी का द्रव आसपास के ऊतकों में रिस रहा हो। यदि सरदर्द जारी रहता है, तो मरीज़ की बाँह की शिरा से कुछ रक्त निकालकर एपिड्यूरल स्पेस में इंजेक्ट कर दिया जाता है (इसे ब्लड पैच कहते हैं)। इस प्रक्रिया से सेरेब्रोस्पाइनल द्रव का रिसाव बंद हो जाता है, जिससे मरीज़ का सरदर्द दूर होने में मदद मिलती है। निष्कर्ष
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