CT स्कैन

CT स्कैनः एक्स-रे से बेहतर चित्र
एक्स-रे विज्ञान और कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी के समन्वय से, कम्प्यूटराइज़्ड टॉमोग्राफ़ी (CT या CAT स्कैन्स) में, पारंपरिक एक्स-रे से कहीं अधिक केन्द्रित और जानकारी देने वाली तस्वीरें प्राप्त होती हैं। CT स्कैन से हड्डी, कोमल ऊतक, शरीर के अवयवों, कशेरुकाओं की चक्रिका और सुषुम्ना के स्पष्ट चित्र प्राप्त होते हैं। इन चित्रों को काले/सलेटी/सफेद के अलावा अन्य रंगों में भी तैयार किया जा सकता है। चित्र को और अधिक स्पष्ट करने के लिए जाँच के दौरान मरीज़ के शरीर में एक कंट्रास्ट माध्यम (डाई) को इंजेक्ट किया जा सकता है।

Scoliosis Associates में हम रीढ़ की हड्डी की विभिन्न बीमारियों, जैसे कि हर्नियेटेड या बल्जिंग डिस्क्स, फ्रैक्चर, संक्रमण, ट्यूमर, तंत्रिका भेदन और चक्रिका ह्रास से संबंधित रोगों के निदान के लिए CT स्कैन का प्रयोग करते हैं।

CT स्कैन में मरीज़ों को विकिरण के महत्त्वपूर्ण स्तरों से गुज़रना पड़ता है। लेकिन इन स्तरों पर सावधानी से नज़र रखी जाती है, और मरीज़ की सुरक्षा हमेशा सुनिश्चित की जाती है। इसके बावजूद, विकिरण से गुज़रना चिंता का विषय है, इसीलिए हमारे चिकित्सक CT स्कैन का निर्देश तभी देते हैं जब निदान प्रक्रिया में इसकी बहुत अधिक आवश्यकता हो।

उपकरण
CT मशीन एक बहुत बड़े मालपुए या अँगूठी की तरह दिखती है। इस मालपुए जैसे छेद में एक पैडेड सचल टेबल, जिस पर मरीज़ को लिटाया जाता है, अंदर-बाहर सरकती है। उस मालपुए के आकार के अंदर एक बड़ा सचल छल्ला होता है, जिसमें एक्स-रे तथा अन्य जाँच उपकरण होते हैं। जाँच के दौरान यह छल्ला मरीज़ के इर्द-गिर्द घूमता है ताकि शरीर के विशिष्ट हिस्सों या “फाँकों” के चित्र लिये जा सकें।

यह कैसे काम करता है
स्कैन के दौरान शरीर के जिस अंग की जाँच की जा रही है, उस के विशेष कोणों से कई एक्स-रे चित्र लिये जाते हैं। विपरीत दिशा में लगा डिटेक्टर, स्कैन का विवरण कम्प्यूटर को भेजता है, जो प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करता है और उस अंग के क्रॉस-सेक्शन वाले चित्र उपलब्ध कराता है। इन्हीं क्रॉस-सेक्शन वाले चित्रों या “फाँकों” को टॉमोग्राम्स कहते हैं। इन चित्रों को मॉनिटर पर प्रदर्शित किया जा सकता है, जिन्हें कम्प्यूटर फ़ाइल्स के रूप में संचित किया जा सकता है या सामान्य एक्स-रे फ़िल्म पर प्रिंट किया जा सकता है।

क्या उम्मीद रखें
CT स्कैन के लिए किसी ख़ास शारीरिक तैयारी की ज़रूरत नहीं होती। जाँच से पहले मरीज़ को अपने खान-पान पर रोक लगाने की भी ज़रूरत नहीं होती, जब तक कि कंट्रास्ट माध्यम (डाई) का प्रयोग न होना हो। अगर कंट्रास्ट एंजेट का प्रयोग होना हो, तो हर मरीज़ को जाँच-पूर्व व्यक्तिगत निर्देश दिये जाते हैं।

मरीज़ से कहा जाता है कि वह अपने गहने या अन्य धातु की वस्तुएँ उतार दे और मेडिकल गाउन पहन ले।

मरीज़ को CT टेबल पर लिटाया जाता है और उसका हिलना-डुलना रोकने के लिए स्ट्रैप बाँधे जाते हैं। मरीज़ को कंबल से ढँक दिया जाता है (यदि ठंड हो) और टेबल को स्कैनर के अंदर सरका दिया जाता है। यह आवश्यक है कि स्कैन के दौरान मरीज़ यथासंभव हिले-डुले नहीं।

जिन मरीज़ों को बंद स्थानों का भय हो, उन्हें हल्की, शांत रखने वाली दवा दी जा सकती है। मरीज़ों को अक्सर संगीत सुनने के लिए हेडफ़ोन्स दिये जाते हैं क्योंकि स्कैनर घूमते हुए काफ़ी आवाज़ करता है।

CT स्कैनर वाले कमरे के पास ही तकनीशियन के काम करने का स्थान होता है। तकनीशियन पूरी प्रक्रिया के दौरान एक बड़ी खिड़की से मरीज़ को देख सकता है और उससे बात कर सकता है। इस जाँच में लगभग 30 से 60 मिनट लगते हैं।

निष्कर्ष
हम समझते हैं कि CT स्कैन की तैयारी करते समय कई मरीज़ों को घबराहट होती है। हमारे विशेषज्ञों का दल, इस जाँच के दौरान आपको तनावमुक्त और आराम से रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

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