वयस्क ह्रासपरक स्कोलियोसिस (एडल्ट डिजेनेरेटिव स्कोलियोसिस )

स्कोलियोसिस, या रीढ़ की हड्डी का झुकाव, ऐसा रोग है, जिसे बहुत से लोग केवल किशोरों से जुड़ा हुआ मानते हैं। लेकिन स्कोलियोसिस वयस्कों को भी हो सकती है। वयस्क स्कोलियोसिस का अर्थ है - 18 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज़ की रीढ़ की हड्डी में असामान्य झुकाव। कभी-कभी यह बचपन में आए उस झुकाव के कारण होता है, जिसका पहले इलाज नहीं किया गया और वह बढ़ गया। यदि किसी ऐसे वयस्क को स्कोलियोसिस हो, जिसको बचपन में कोई झुकाव नहीं था, तो इसे वयस्क ह्रासपरकता (नव ह्रासपरकता) स्कोलियोसिस वर्ग में रखा जाता है।

लक्षण
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर में अनेक परिवर्तन होते हैं। और रीढ़ की हड्डी के बारे में तो यह बात विशेष रूप से सही है। जब रीढ़ की हड्डी के हिस्सों में ह्रास होने लगता है, तब बहुत से लोगों की पीठ या गर्दन में भारी दर्द शुरू हो जाता है। रीढ़ की हड्डी के ह्रास की आम बीमारियों में शामिल हैं:

  • स्पाइनल स्टेनोसिस
  • चक्रिका ह्रास रोग (डीजेनेरेटिव डिस्क रोग)
  • ऑस्टियोपोरोसिस
  • कशेरुकाओं का दबाव से टूट जाना

इनमें से किसी भी बीमारी के कारण रीढ़ की हड्डी बाँयीं ओर अथवा दायीं ओर झुकने लगती है। यह झुकाव केवल देखने में ही भद्दा नहीं लगता, बल्कि इससे अन्य समस्यायें भी हो सकती हैं, जैसे किः

  • धड़ का असंतुलन, जिसमें मरीज़ एक तरफ़ झुकता दिखाई देता है
  • रीढ़ की हड्डी की अस्थिरता
  • किसी एक ओर पसलियों का उभर जाना
  • कूबड़
  • पैरों की लंबाई में अंतर आ जाने के कारण अनियमित चाल
  • दर्द
  • बैठने या खड़े होने में कठिनाई
  • रीढ़ की हड्डी में कड़ापन
  • तंत्रिकाओं को हानि
  • कार्डियोपल्मोनरी (हृदय और फेफड़ों) की समस्यायें

निदान
वयस्कों की ह्रासपरक स्कोलियोसिस के इलाज का पहला और बेहद महत्त्वपूर्ण क़दम है, रोग का सही निदान। Scoliosis Associates में हम साधनों और आधुनिक निदान तकनीकों का संयुक्त उपयोग करते हैं:

  • चिकित्सीय पृष्ठभूमि। हम आपसे, आपके लक्षणों, उनकी गंभीरता और अब तक किये गये इलाजों के बारे में बात करेंगे। हम आपके परिवार में हुए स्कोलियोसिस के इतिहास में खास तौर पर रुचि लेंगे।
  • शारीरिक जाँच। हमारे रीढ़ की हड्डी के विशेषज्ञ आपकी सावधानी से जाँच करेंगे ताकि आपके चलने-फिरने के सीमित होने, संतुलन की समस्याओं, दर्द, शरीर के छोरों (हाथों और पैरों) में रिफ़्लेक्स की कमी, पेशियों की कमज़ोरी, संवेदना में कमी या तंत्रिकाओं के नुकसान के अन्य लक्षणों का पता लगा सकें। आपसे अनेक प्रकार की गतिविधियों वाले व्यायाम करने को भी कहा जायेगा, जिसमें कमर से बगल की ओर, पीछे और आगे झुकना शामिल है। डॉक्टर आपकी टाँगों को भी नापकर देखेंगे कि कहीं उनकी लंबाई में अंतर तो नहीं है।
  • निदानात्मक परीक्षण। आम तौर पर, हम आपको खड़ा करके लिए गए एक्स-रे से शुरुआत करते हैं, जो सामने से और बगल से लिये जाते हैं। रीढ़ की हड्डी का लचीलापन जाँचने के लिए कभी-कभी बगल की ओर झुककर ट्रैक्शन एक्स-रे भी लिये जाते हैं। निदान की पुष्टि करने के लिए हम CT स्कैन या MRI भी कर सकते हैं। कुछ मरीज़ों के लिए हम मायलोग्राम भी कर सकते हैं। इस जाँच में एक तरल डाई का प्रयोग किया जाता है, जिसे स्पाइनल कॉलम में इंजेक्ट करके, संबंधित कशेरुकाओं के बीच तंत्रिकाओं के दबने के स्तर का पता लगाया जाता है। अगर झुकाव का पता लगता है तो आपके डॉक्टर उसकी गंभीरता और आकार के अनुसार उसका वर्गीकरण करेंगे।

उपचार
वयस्क स्कोलियोसिस के अधिकांश मामलों में बग़ैर ऑपरेशन इलाज किया जाता है। इनमें शामिल हैं:

  • सॉफ़्ट टिश्यू थेरेपीज़
  • दर्द और सूजन कम करने की दवायें
  • बैठने का ढंग ठीक करने और शक्ति बढ़ाने के लिए पीठ के व्यायाम
  • कुछ मामलों में, ब्रेसिंग का भी प्रयोग किया जा सकता है (लेकिन केवल दर्द नियंत्रित करने के लिए, विकृति सुधारने के लिए नहीं)

वयस्कों की ह्रासपरक स्कोलियोसिस के लिए किया जाने वाला ऑपरेशन आम नहीं है। लेकिन, निम्नलिखित परिस्थितिओं में यह आवश्यक हो सकता हैः

  • जब बग़ैर-ऑपरेशन इलाज की पद्धतियाँ असफल हो जाएँ और दर्द जारी रहे
  • जब रीढ़ की हड्डी का झुकाव बढ़ता जा रहा हो या अत्यधिक हो (45 डिग्री से अधिक)
  • झुकाव के कारण कार्डियोपल्मोनरी (हृदय और फेफड़ों) की समस्याओं के सबूत मिल रहे हों

यदि सर्जरी आवश्यक है, तो उसमें दो या दो से अधिक कशेरुकाओं के संयोजन के साथ रीढ़ की हड्डी में उपकरण लगाना (उसे सीधा करने के लिए रॉड या स्क्रू या अन्य साधनों का प्रयोग) भी शामिल हो सकता है। यह डॉ. लोनर तय करेंगे कि आपके लिए किस तरह की सर्जरी सबसे उत्तम रहेगी। निश्चिंत रहें कि यदि सर्जरी की आवश्यकता है, तो समय से पूर्व ही आपको उसके सभी पहलुओं, जोखिम और फ़ायदों की पूरी जानकारी दे दी जायेगी।

ध्यान रखें कि, वयस्क स्कोलियोसिस के बहुत से मामलों में किसी भी इलाज की ज़रूरत नहीं होती। समय के साथ झुकाव बढ़ रहा है या नहीं, यह देखने के लिये “प्रतीक्षा की नीति” भी अपनाई जा सकती है। इस बीच आवश्यक है कि आप स्वस्थ बने रहने के लिए नियमित व्यायाम करें ताकि लचीलापन और शक्ति बनी रहे, सही भोजन करें, धूम्रपान न करें, और शरीर को ठीक तरह से रखना सीखें (मुद्रा, भारी वज़न उठाने का सही तरीका, आदि) पीठ की अन्य समस्याओं से बचने का यही सर्वश्रेष्ठ तरीका है।

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किशोर इडियोपैथिक स्कोलियोसिस
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Degenerative Scoliosis in Adults - English Language

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