निदानात्मक इंजेक्शन

एक्स-रे, CT स्कैन और MRI से रीढ़ की हड्डी की विभिन्न विकृतियों के उत्कृष्ट चित्र प्राप्त होते हैं। लेकिन, वे दर्द को नहीं दिखा सकते। रीढ़ की हड्डी में दर्द पर नियंत्रण के लिए सामान्यतः दिये जाने वाले इंजेक्शनों का उपयोग दर्द के स्रोत का पता लगाने के लिए निदानात्मक रूप से भी किया जाता है। निदानात्मक रीढ़ के इंजेक्शनों में शामिल हैं, डिस्कोग्राफ़ी (डिस्कोग्राम), सेलेक्टिव नर्व रूट ब्लॉक (SNRB), सैक्रोइलियक जोड़ इंजेक्शन और फेसेट जोड़ इंजेक्शन।

रीढ़ की हड्डी में दर्द का स्रोत आम तौर पर तंत्रिका-मूल और कशेरुकाओं के बीच की चक्रिकाओं में होता है। उदाहरण के लिए, लम्बर हर्नियेटेड डिस्क (हर्नियाग्रस्त चक्रिका) से पास की कोई तंत्रिका दबने लगती है जिससे नितंब और टाँग में दर्द होता है। सर्वाइकल तंत्रिका-मूल दबने से कंधे और बाँह में दर्द होता है। किस प्रकार का निदानात्मक इंजेक्शन लगाना है, इसका फ़ैसला रोगी के चिकित्सा इतिहास, शारीरिक तथा तंत्रिका-तंत्र से संबंधित परीक्षण, और CT स्कैन जैसी अन्य जाँचों के अनुसार किया जाता है।

डिस्कोग्राफ़ी
डिस्कोग्राम से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि क्या कशेरुकाओं के बीच की कोई विशेष चक्रिका दर्द का कारण है। यह सामान्य जाँच नहीं है, और तभी कराई जा सकती है जब सर्जरी करने पर विचार किया जा रहा हो।

संदिग्ध चक्रिका (या चक्रिकाओं) में फ़्लूरोस्कोपी (एक तकनीक जिसमें रोगी के भीतरी अवयवों का हूबहू चित्र प्राप्त होता है) के तहत कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट की जाती है। इस डाई से चक्रिका की संरचना की विशिष्टतायें स्पष्ट हो जाती हैं। डिस्क या तो सामान्य दिखाई देती है या उसकी दीवारों में फटन (दरारें) दिखाई दे सकती हैं।

डिस्कोग्राफ़ी जाँच तकलीफ़देह हो सकती है। डाई इंजेक्ट करने पर रोगी के रोग के सामान्य लक्षण उभर सकते हैं। इसे सकारात्मक डिस्कोग्राम कहते हैं। रोगी का दर्द बढ़ना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उससे दर्द के सही स्रोत का पता लगता है। अगर इंजेक्शन से रोगी को दर्द नहीं होता, तो जाँच को नकारात्मक डिस्कोग्राम कहते हैं।

इस प्रक्रिया में, इंजेक्ट की जाने वाली चक्रिकाओं की संख्या (रीढ़ के स्तरों) के आधार पर 30 से 45 मिनट लगते हैं। संक्रमण होने की आशंका रहती है, हालाँकि ऐसा बहुत कम ही होता है। संक्रमण से बचाव के लिए प्रक्रिया से पहले या डाई के साथ एंटीबायोटिक्स के इंजेक्शन दिये जाते हैं।

सेलेक्टिव नर्व रूट ब्लॉक (SNRB)
SNRB यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि क्या दर्द का स्रोत, रीढ़ की हड्डी की कोई विशेष तंत्रिका है। इससे सर्वाइकल या लम्बर रेडिकुलोपैथी (शरीर के किसी विशेष भाग तक जाने वाली तंत्रिका के मूल में ख़राश और सूजन) का निदान करने में मदद मिलती है।

फ़्लूरोस्कोपिक दिशानिर्देशानुसार विशेषज्ञ एक खास तंत्रिका-मूल में स्टीरॉयड दवा का इंजेक्शन देते हैं। स्टीरॉयड सूजन को कम करने वाली कड़ी दवा है। यदि इंजेक्शन से रोगी के लक्षणों में कमी आती है या वे दूर हो जाते हैं, तो दर्द के स्रोत का पता लग जाता है। रीढ़ की हड्डी के प्रत्येक स्तर की जाँच में 15 से 30 मिनट लगते हैं।

फेसेट और मीडियल ब्लॉक्स
रीढ़ की हड्डियों के बीच के जोड़ों की सूजन से पीठ में दर्द हो सकता है। फेसेट और मीडियल ब्लॉक्स में जोड़ों के आसपास स्टीरॉयड दवा का इंजेक्शन दिया जाता है, ताकि यह पता लग सके कि क्या वही जोड़ दर्द का कारण है। स्टीरॉयड से सूजन कम होती है और दर्द से राहत मिलती है।

फेसेट जोड़ ब्लॉक में जोड़ों के अंदर लोकल एनीस्थेटिक और स्टीरॉयड दवा का इंजेक्शन लगाया जाता है। मीडियल ब्लॉक में उसी तरह की दवाओं का इंजेक्शन जोड़ के बाहर स्थित उस संवेदना की तंत्रिका के पास की जगह पर लगाया जाता है, जो उस जोड़ तक संवेदना का प्रवाह करता है। ये इंजेक्शन फ़्लूरोस्कोपी के तहत दिये जाते हैं।

यदि दर्द कम हो जाता है, तो इसका मतलब यह है कि वही संदिग्ध जोड़ या मीडियल तंत्रिका दर्द पैदा कर रही है।

सैक्रोइलियक जोड़ इंजेक्शन
सैक्रोइलियक जोड़, रीढ़ की हड्डी का सबसे बड़ा जोड़ है। यह रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में टेलबोन के ऊपर होता है। सैक्रोइलियक जोड़ की सूजन से पीठ के निचले हिस्से और नितंबों में दर्द हो सकता है।

फ़्लूरोस्कोपी का प्रयोग करते हुए, सैक्रोइलियक जोड़ में लोकल एनेस्थीसिया और स्टीरॉयड दवा इंजेक्ट की जाती हैं। यदि दर्द कम हो जाता है, तो इसका मतलब यह है कि संदिग्ध जोड़ दर्द पैदा कर रहा है।

मरीज़ों की तैयारीः घर पर
यह आवश्यक है कि मरीज़ जाँच-पूर्व सभी निर्देशों का पालन करे ताकि निदानात्मक इंजेक्शन के नतीजे सही आयें। इनमें से कुछ निर्देश हैं:

  • जाँच के दो दिन पहले से, खून को पतला करने वाली दवायें लेना बंद कर दें
  • जाँच से 5 दिन पहले से एस्पिरिन दवायें न लें
  • जाँच से 5 दिन पहले से सूजन रोधी दवायें लेना बंद कर दें (VioxxT या CelebrexT इसका अपवाद हैं)
  • जाँच के 8 घंटे पहले से दर्द की दवा लेना बंद कर दें
  • जाँच के 6 घंटे पहले से कुछ खायें-पियें नहीं
  • घर वापस आने के लिए किसी व्यक्ति से परिवहन की व्यवस्था करने को कहें

मरीज़ों की तैयारीः चिकित्सा सुविधा केन्द्र में

  • चिकित्सा कर्मचारी मरीज़ की पृष्ठभूमि, बीमारी, रोज़ ली जाने वाली दवाओं, भोजन तथा/अथवा दवाओं से अलर्जी, और अन्य सूचनाओं की समीक्षा करेंगे।
  • मरीज़ कपड़े बदलकर गाउन पहनता है और अस्पताल के बेड पर लेट जाता है।
  • मरीज़ को EKG मॉनिटर (हृदय की गतिविधियों के लिए), स्वचालित ब्लड प्रेशर कफ़ (रक्तचाप नापने के लिए), और ऑक्सीमीटर (रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को नापने के लिए) लगा दिये जाते हैं। इस उपकरण से चिकित्साकर्मी, प्रक्रिया से पहले, उसके दौरान, और बाद में मरीज़ के जीवन चिन्हों पर लगातार निगरानी रख सकते हैं।
  • मरीज़ को आराम देने के लिए इंजेक्शन से दवा दे दी जाती है। कुछ मामलों में, इंट्रावीनस इंजेक्शन के ज़रिये हल्की दर्द निवारक दवा भी दी जा सकती है। रीढ़ की हड्डी के निदानात्मक इंजेक्शनों में मरीज़ के जागे रहने की ज़रूरत होती है ताकि वह इंजेक्शन विशेषज्ञ के सवालों के जवाब दे सके।

प्रक्रिया के दौरान क्या उम्मीद रखें

  • यह प्रक्रिया ऑपरेशन रूम जैसे कीटाणुरहित परिवेश में पूरी की जाती है।
  • इंजेक्शन की जगह को साफ़ किया जाता है और ढक दिया जाता है। उस जगह और उसके आसपास की त्वचा को सुन्न करने वाली दवा का इंजेक्शन लगाया जाता है।
  • आगे बढ़ने से पहले, फ़्लूरोस्कोपी सी-आर्म मरीज़ के ऊपर ले जाई जाती है। फ़्लूरोस्कोपी निर्देश का प्रयोग, प्रक्रिया के दौरान सुई को सही स्थान तक ले जाने के लिए किया जाता है।
  • सुई के सही स्थिति में आ जाने के बाद, उस हिस्से को स्पष्ट प्रदर्शित करने के लिए कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट की जाती है। कंट्रास्ट डाई के बाद स्टीरॉयड घोल में एनीस्थेटिक भी इंजेक्ट किया जाता है। स्टीरॉयड घोल में एंटीबायोटिक भी शामिल हो सकती है।
  • इस प्रक्रिया का उद्देश्य है मरीज़ के सामान्य लक्षणों को उभारना। मरीज़ झुककर, घूमकर, चलकर या बैठकर भी इन लक्षणों को पैदा कर सकता है। मरीज़ के जवाबों से दर्द का कारण पहचानने में मदद मिलती है।

जाँच प्रक्रिया के बाद

  • मरीज़ को स्ट्रेचर से रिकवरी क्षेत्र में ले जाया जाता है, जहाँ चिकित्साकर्मी उसके जीवन लक्षणों पर निगरानी रखना जारी रखते हैं।
  • मरीज़ों को आम तौर पर 30-60 मिनट के अंदर, लिखित निर्देश देकर छुट्टी दे दी जाती है।
  • इंजेक्शन दिये जाने की जगह के आसपास का हिस्सा सुन्न रहता है। इंजेक्शन के बाद सामान्य लक्षणों से राहत 6 घंटे तक जारी रह सकती है।
  • स्टीरॉयड के अनुषंगी प्रभाव हो सकते हैं, जैसे कि धुँधली दृष्टि, बार-बार पेशाब आना, प्यास बढ़ जाना और ब्लड शुगर का स्तर बदलना, ख़ास तौर पर मधुमेह के रोगियों में । यदि ये अनुषंगी प्रभाव तकलीफ़देह हो जायें या बिगड़ जायें तो, चिकित्सक से संपर्क करें।
  • यदि बुखार, कँपकँपी, दर्द बढ़ना, कमजोरी या मल/मूत्र त्याग में रुकावट के लक्षण प्रकट होने लगें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
  • मरीज़ों को जाँच के नतीजे के लिए इलाज कर रहे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

संभावित जटिलतायें
मरीज़ों पर प्रतिबंध

  • कंट्रास्ट माध्यम तथा/अथवा इंजेक्शन से दी जाने वाली दवाओं से अलर्जी
  • एनीमिया (रक्ताल्पता)
  • दमा की बीमारी
  • खून बहने संबंधी समस्यायें
  • संक्रमण
  • गुर्दे की बीमारी
  • गर्भावस्था/स्तनपान कराने के समय
  • रीढ़ की हड्डी की गंभीर असामान्यता

निष्कर्ष
निदानात्मक इंजेक्शन, मरीज़ के दर्द के स्रोत की पहचान करने में उपयोगी भूमिका निभाते हैं। लेकिन, यह प्रक्रिया मरीज़ के लिए अक्सर तकलीफ़देह और दर्दभरी होती है। हम इन परीक्षणों का महत्त्व और इनके कारण मरीज़ों को होने वाली तकलीफ़, दोनों को ही समझते हैं। हमारे विशेषज्ञ इन प्रक्रियाओं को यथासंभव आरामदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम मरीज़ों को प्रक्रिया के बारे में सावधानी से समझाते हैं क्योंकि हमने अनुभव किया है कि अगर वे समझते हैं कि क्या हो रहा है तो अच्छी तरह बर्दाश्त कर पाते हैं।


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