


फ़्लैटबैक सिंड्रोमफ़्लैटबैक सिंड्रोम में अनेक विकृतियाँ सम्मिलित होती हैं, जिसकी पहचान इस तरह की जाती है कि मरीज़ की पीठ के निचले हिस्से के घूमने की क्षमता (लार्डोसिस) में कमी के कारण मरीज़ को सीधे खड़े होने में कठिनाई होती है। इसकी वजह से मरीज़ आगे की ओर झुका रहता है। इसके लक्षण आम तौर से पुरानी हैरिंगटन रॉड पद्धति के कारण उत्पन्न प्रभावों जैसे होते हैं, जो कई वर्ष पूर्व स्कोलियोसिस के लिए अपनाई जाती थी। इसमें प्रायः संयोजन मरीज़ों के निचले लम्बर क्षेत्र तक कर दिया जाता था। इस हैरिंगटन रॉड सुधार पद्धति के कारण लम्बर क्षेत्र का सामान्य घुमाव सीधा या चपटा हो जाता था। सर्जरी के बाद कई वर्षों तक, मरीज़ों की संयोजन की गई चक्रिकाओं के नीचे की स्वस्थ चक्रिकायें इस क्षति की पूर्ति करती रहती थीं, लेकिन जब कुछ वर्ष बाद उन चक्रिकाओं का ह्रास होने लगता था तब मरीज़ों को आराम से सीधे खड़े होने में तकलीफ़ होती थी। ऐसे मरीज़ पीठ में दर्द की शिकायत करते थे और उन्हें काफ़ी अधिक अपंगता हो जाती थी। फ़्लैटबैक सिंड्रोम के अन्य कारणों में रीढ़ की हड्डी के अनेक स्तरों में चक्रिका ह्रास रोग, एंकिलूसिंग, स्पोंडिलाइटिस, और कशेरुका के फलक को काटकर अलग कर देने के बाद का सिंड्रोम शामिल है। हालाँकि फ़्लैटबैक सिंड्रोम के लिए बग़ैर-ऑपरेशन के उपचार के भी प्रयास किये जा सकते हैं लेकिन आम तौर पर सर्जरी से ही उपचार किया जाता है। इसमें रीढ़ की हड्डी को काटकर (ऑस्टियोटॉमी) उसमें उपकरण लगाये जाते हैं ताकि उसे सीधा किया जा सके और मरीज़ को आरामदायक सीध और संतुलन प्राप्त हो सके। फ़्लैटबैक सिंड्रोम की सर्जरी के बाद मरीज़ की गतिविधियाँ वापस लाने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में अक्सर उल्लेखनीय सफलता मिलती है। मामले का उदाहरण #1
इस 42 वर्षीय महिला का किशोरवस्था में स्कोलियोसिस सुधारने के लिए हैरिंगटन रॉड पद्धति से इलाज किया गया था। इसके परिणामस्वरूप कमर का निचला भाग असामान्य रूप से सपाट हो गया। इसके परिणामस्वरूप, इसमें फ़्लैटबैक सिंड्रोम के लक्षण पैदा हो गये। इसका इलाज पेडिकल सबट्रैक्शन ऑस्टियोटॉमी से किया गया। यह एक नई तकनीक है जिसमें स्वाभाविक घुमाव लौट आता है। इस मरीज़ को अब लगता है कि उसे नया जीवन मिला है। फ़्लैटबैक सिंड्रोम का इलाज कराने वाले अधिकांश मरीज़ों को ऐसा ही महसूस होता है। मामले का उदाहरण #2
इस 40 वर्षीय महिला की किशोरवस्था में की गई ख़राब सर्जरी के कारण फ़्लैटबैक सिंड्रोम के साथ-साथ धड़ के अगले हिस्से की प्रणालियों में बाधाएँ उपस्थित हो गई थीं। इसका सुधार ऑस्टियोटॉमी द्वारा उसके अगले तथा पिछले हिस्सों का पुनर्निर्माण करके किया गया। अब उसकी रीढ़ की हड्डी में प्रभावशाली सुधार आया है। इससे उसकी गतिविधियों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
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