फ़िज़िकल थेरेपी

फ़िज़िकल थेरेपी क्या है?
फ़िज़िकल थेरेपी, जिसे गतिविधि पुनर्वास भी कहा जाता है, ऐसा कार्यक्रम है, जो मरीज़ की गतिविधि संबंधी क्षमताओं (जैसे कि दैनिक जीवन का कामकाज) को बेहतर बनाने और बनाये रखने में मदद देने के लिए तैयार किया जाता है। फ़िज़िकल थेरेपी में शक्ति, लचीलापन और सहनशीलता बढ़ाना, और रीढ़ की हड्डी की स्थिरता तथा उसे चोट आदि से बचाने के लिए सही बायोमैकेनिक्स (जैसे कि बैठने-उठने के सही तरीके) सीखना शामिल है।

इस उपचार में सामान्यतः निष्क्रिय और सक्रिय उपचार शामिल होते हैं। निष्क्रिय उपचारों में हड्डियों का हाथों से इलाज (ऑर्थोपीडिक मैनिप्युलेशन), बिजली से उद्दीपन, पेशी का तनाव दूर करना, अल्ट्रासाउंड और गर्मी/बर्फ़ से सेंक शामिल हैं। सक्रिय उपचारों में रोगनिवारक व्यायाम जैसे कि फ़्लोर एक्सरसाइज़, विशेष उपकरणों पर व्यायाम और पानी से थेरेपी शामिल हैं।

निष्क्रिय थेरेपी

ऑर्थोपीडिक मैनिप्युलेशनः मैन्युएल थेरेपी
मैन्युएल थेरेपी में मैनिप्युलेशन (हस्तोपचार) और गतिशील बनाने की प्रक्रिया शामिल हैं। इस थेरेपी में अकड़े हुए जोड़ों को पुनः गतिशील बनाना (जैसे कि अंग-क्रिया की गति बढ़ाना) है और दर्द कम करना शामिल हैं। मैनिप्युलेशन एक निष्क्रिय प्रकार का, विशेष रूप से नियंत्रित, झटका है जो जोड़ को उसकी सही स्थिति में ले आता है तथा/अथवा पेशियों की ऐंठन कम करता है, जिसके कारण रीढ़ की हड्डी की तंत्रिकाओं में समस्याएँ उत्पन्न हो रही थीं।

मैन्यूएल थेरेपी से पूर्व, कोई निष्क्रिय थेरेपी दी जा सकती है। निष्क्रिय थेरेपी में गर्म सेंक, अल्ट्रासाउंड तथा/अथवा बिजली से उद्दीपन शामिल हो सकते हैं। इन विधियों (उपचारों) से नीचे के कोमल ऊतकों को गर्मी और आराम मिलता है, जिससे जोड़ों को ज़्यादा आसानी से प्रभावित किया जा सकता है।

बिजली से उद्दीपन
बिजली से उद्दीपन को ट्रान्सक्युटेनियस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टीमुलेशन (TENS) भी कहा जाता है। TENS में मरीज़ की त्वचा के भीतर विशिष्ट स्नायुओं तक बिजली का करंट दर्दरहित तरीके से पहुँचाया जाता है। इस करंट से हल्की गर्मी उत्पन्न होती है जो मरीज़ को जकड़न और दर्द से राहत देती है और गतिशीलता बढ़ाने में मदद करती है। इस उपचार में न तो कोई शल्यक्रिया है और न ही इसके कोई ज्ञात अनुषंगी प्रभाव हैं। इसका प्रयोग बहुत तेज़ और पुराने दर्द के लिए किया जाता है।

मायोफ़ेशियल रिलिज़
फ़ेशिया (Fascia) आपस में जुड़े हुए ऊतकों की झिल्ली होती है जो पेशियों, हड्डियों और शरीर के अवयवों को सहारा देती है। चोट लगने या उठने-बैठने का तरीका सही न होने से फ़ेशिया कड़ी हो जाती है। फ़ेशिया के सिकुड़ने से पेशी या हड्डी अपने स्थान से खिंच जाती है, जिससे दर्द होता है। फ़िज़िकल थेरेपिस्ट अपनी उँगलियों, हथेलियों, कोहनी और हाथों का प्रयोग कर फ़ेशिया को धीरे-धीरे किंतु दृढ़ता से विस्तार देता है।

अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड पीठ और गर्दन के दर्द, टैंडन (कण्डरा) और लिगामेंट (स्नायु) की तकलीफ़, पेशी की ऐंठन, जोड़ों की समस्याओं तथा रीढ़ की हड्डी से जुड़ी अन्य बीमारियों के इलाज के लिए आम तौर पर अपनाई जाने वाली एक बग़ैर ऑपरेशन वाली थेरेपी है।

फ़िज़िकल थेरेपिस्ट मरीज़ की त्वचा पर जेल लगाता है ताकि रगड़ न लगे और अल्ट्रासाउंड प्रोब धीरे-धीरे उस हिस्से पर घुमाता है। अल्ट्रासाउंड में ऊतकों (जैसे कि पेशियों के) में गहराई तक गर्मी पहुँचाने के लिए उच्च-फ्रीक्वेंसी वाली ध्वनि-तरगों का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरेपी से रक्तसंचार बढ़ता है और बीमारी के ठीक होने, पेशियों की ऐंठन ठीक होने, सूजन कम करने और दर्द दूर करने में मदद मिलती है।

बर्फ़ और गर्मी से थेरेपी
ठंडे उपचार कभी भी सीधे त्वचा पर नहीं दिये जाते, क्योंकि अत्यधिक ठंड से त्वचा के ऊतकों को नुकसान पहुँच सकता है। त्वचा और ठंड के स्रोत के बीच तौलिया जैसा कोई व्यवधान रख दिया जाता है। बर्फ़ से रक्त संचार में कमी आती है, जिससे सूजन और दर्द भी कम होता है।

गर्मी वाली थेरेपी के विकल्पों में हीट पैक (त्वचा के व्यवधान सहित) और अल्ट्रासाउंड शामिल हैं। नमीयुक्त गर्मी प्रभावित हिस्से में रक्तसंचार बढ़ाती है। रक्त के साथ प्रभावित हिस्से में पोषक तत्त्व पहुँचते हैं और दूषित पदार्थों (टॉक्सिन) को हटाने में मदद मिलती है। गर्मी से, अकड़ी हुई और दर्द करती पेशियों को राहत मिलती है।

सक्रिय थेरेपी (थेरेप्यूटिक व्यायाम)

पानी की थेरेपी और व्यायाम
ऑस्टियो-आर्थराइटिस, रह्यूमाटॉयड आर्थराइटिस, स्पाइनल स्टेनोसिस, पीठ और गर्दन के दर्द तथा रीढ़ की हड्डियों की अन्य बीमारियों के मरीज़ों को पानी की थेरेपी (हाइड्रोथेरेपी) से लाभ होता है। यह इलाज अक्सर गर्म पानी वाले पूल में किया जाता है। पानी की थेरेपी का इस्तेमाल गतिशीलता की कमी, कमजोरी, भार उठाने की क्षमता में कमी, दर्द, लचीलेपन और समन्वय की कमी के इलाज में किया जाता है।

गर्म पानी से पेशियों को राहत मिलती है। पानी में भार कम हो जाने के गुण की वजह से जोड़ों को अधिक जोर लगाए बिना हिलाया-डुलाया जा सकता है। अक्सर, मरीज़ जो काम ज़मीन पर नहीं कर पाते, पानी में कर लेते हैं।

थेराप्यूटिक व्यायाम
थेराप्यूटिक व्यायाम से हर किसी को फ़ायदा होता है। व्यायाम से शक्ति बढ़ती है, संतुलन और समन्वय बेहतर होता है, नींद अच्छी आती है, लचीलापन बढ़ता है, हृदय प्रणाली उद्दीप्त होती है, पेशियों में सुधार होता है और पेशियों तथा हड्डियों का कड़ापन, थकान और दर्द दूर होते हैं। फ़िज़िकल थेरेपिस्ट प्रत्येक मरीज़ की व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार उसके लिए अलग कार्यक्रम तैयार करते हैं।

थेराप्यूटिक व्यायाम से पहले, सामान्यतः निष्क्रिय उपचार दिया जाता है और उसके बाद कुछ समय व्यायाम-पूर्व वॉर्म-अप गतिविधियों में बिताया जाता है। शरीर को वॉर्म-अप (उत्तेजित) करने के लिए ट्रेडमिल पर चला या किसी स्थिर साइकिल को चलाया जा सकता है।

सुरक्षित ढंग से चलना सीखनाः बायोमैकेनिक्स
फ़िज़िकल थेरेपी के दौरान, मरीज़ों को सिखाया जाता है कि उठने बैठने का सही ढंग (मुद्रा) क्या है। सही मुद्रा (पॉस्चर) से रीढ़ की हड्डी को अनावश्यक तनाव और खिंचाव से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। पीठ और गर्दन का दर्द अक्सर ग़लत मुद्रा के कारण होता है। किस तरह चीज़ों को उठाया और लेकर चला जाये, कैसे बैठा या खड़ा हुआ जाये और कार में कैसे चढ़ा-उतरा जाये - यह सब सीखना व्यावहारिक बातें हैं, जिनसे दर्द और नुकसान से बचाव करने और काम तथा आराम की गतिविधियाँ फिर शुरू करने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष
हम अपने मरीज़ों के दीर्घावधि स्वास्थ्य और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारे बहुत से मरीज़ों के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया पुनर्वास कार्यक्रम उनके स्वास्थ्य लाभ का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।


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