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लम्बर डीजेनेरेटिव डिस्क डिज़ीज़
डीजेनेरेटिव डिस्क डिज़ीज़ (DDD) बढ़ती उम्र के वयस्कों की रीढ़ की हड्डी के लम्बर हिस्से में होने वाला अपेक्षाकृत आम रोग है। हमारी कशेरुकाओं के बीच की चक्रिकायें, रीढ़ की हड्डी के लिए झटके सहने का काम करती है, और बढ़ती उम्र के साथ ये धीरे-धीरे सूखती जाती हैं तथा अपनी शक्ति तथा लचीलापन खोने लगती हैं। अधिकतर लोगों में यह परिवर्तन धीरे-धीरे होता है। दरअसल, हमारे बहुत से मरीज़ तो यह जानते तक नहीं कि उन्हें डीजेनेरेटिव डिस्क डिज़ीज़ है। उन्हें इसका पता तब चलता है जब वे स्वास्थ्य संबंधी किसी और समस्या के लिए जाँच करवाते हैं। लम्बर DDD के लक्षण चक्रिका का ह्रास अपने आप में कोई समस्या नहीं है; वह बढ़ती उम्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन, DDD के कारण चक्रिकाओं की ऊँचाई कम हो सकती है, जिससे तंत्रिकाओं का मार्ग संकीर्ण हो जाता है। इसके कारण तंत्रिकायें दबने लगती हैं, और उनमें सूजन तथा दर्द होने लगता है। गंभीर मामलों में, यह तंत्रिकाजन्य दर्द लगातार बना रह सकता है। DDD के कारण मैकेनिकल दर्द भी हो सकता है, जिसमें चक्रिका (‘‘स्तब्धता अवशोषक’’) के ह्रास की वजह से रीढ़ की हड्डियाँ एक-दूसरे को दबाने लगती हैं।
लम्बर DDD का निदान Scoliosis Associates में, हम आपके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। सही निदान करने के लिए, हम अनेक उपकरणों तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी का संयुक्त रूप से उपयोग करते हैं:
- चिकित्सीय पृष्ठभूमि। हम आपसे, आपके लक्षणों, उनकी गंभीरता और अब तक किये गये इलाजों के बारे में बात करेंगे।
- शारीरिक जाँच। हमारे रीढ़ की हड्डी के विशेषज्ञ आपकी सावधानी से जाँच करेंगे ताकि आपके चलने-फिरने के सीमित होने, संतुलन की समस्याओं, दर्द, शरीर के छोरों (हाथों और पैरों) में रिफ़्लेक्स की कमी, पेशियों की कमज़ोरी, संवेदना में कमी या तंत्रिकाओं के नुकसान के अन्य लक्षणों का पता लगा सकें।
- निदानात्मक परीक्षण। आम तौर पर, हम एक्स-रे से शुरुआत करते हैं, ताकि पता लग जाये कि ट्यूमर और संक्रमण जैसी अन्य समस्यायें तो नहीं हैं। MRI भी कराया जायेगा ताकि चिकित्सक चक्रिका ह्रास के स्तर का पता लगा सकें, विशेषरूप से यह जान सकें कि चक्रिका की ऊँचाई तो कम नहीं हुई है। कुछ मामलों में हम निदान की पुष्टि के लिए डिस्कोग्राफ़ी नामक जाँच भी कराते हैं। इस जाँच में प्रभावित चक्रिका (या चक्रिकाओं) में कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट की जाती है ताकि अधिक स्पष्ट तस्वीर मिल सके।
लम्बर DDD का ग़ैर-ऑपरेशन उपचार पीठ के निचले हिस्से में बहुत तेज़ या अचानक होने वाले दर्द के लिए, हम दर्द से राहत देने वाली दवायें, जैसे कि एसीटामिनोफेन (acetaminophen), सूजन कम करने वाले एजेंट, और पेशियों को आराम देने वाली दवायें दे सकते हैं। अस्थायी तौर पर पूरे आराम की भी सलाह दी जा सकती है। लेकिन मरीज़ों को उठने और धीरे-धीरे अपनी सामान्य गतिविधियाँ फिर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
हमारा दृढ़ विश्वास है कि हमारा अस्पताल छोड़ने के बाद भी आप इलाज कराना जारी रखेंगे। इसीलिए जिन मरीज़ों को उससे लाभ हो सकता है, उन्हें हम फ़िज़िकल थेरेपी की सलाह देते हैं। लम्बर DDD के लिए, बताये गये स्ट्रेचिंग व्यायाम से लचीलापन बढ़ता है, और एक्सटेंशन व्यायाम रीढ़ की हड्डी का स्वाभाविक झुकाव बनाये रखने में सहायक होते हैं। पीठ के निचले हिस्से के दर्द में गर्म/ठंडी थेरेपी और हल्की मालिश भी लाभदायक होती है। गंभीर लक्षणों के कम हो जाने के बाद (दो से तीन सप्ताह के अंदर), मरीज़ों को दैनिक व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसमें सप्ताह में तीन बार कम प्रभाव वाली एरोबिक्स और रोज़ाना पीठ के व्यायाम शामिल किये जा सकते हैं।
सर्जिकल उपचार अगर लम्बर DDD के लक्षण इन ग़ैर-ऑपरेशन उपचारों के बावजूद जारी रहते हैं तो कुछ और निदान परीक्षण कराने पड़ सकते हैं। इन परीक्षणों में MRI, CT स्कैन, मायलोग्राम, और संभवतः डिस्कोग्राफ़ी भी शामिल हो सकती है। अगर सर्जन को पता लगता है कि कशेरुकाओं की एक या अधिक चक्रिकायें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और उन्हीं के कारण दर्द या दूसरे लक्षण (जैसेकि पेशियों में कमजोरी) उत्पन्न हो रहे हैं तो सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। सर्जिकल प्रक्रिया में डिस्केक्टॉमी करना (क्षतिग्रस्त चक्रिका को हटाना) और इंटरबॉडी फ्यूज़न करना (हटाई गई चक्रिका के ऊपर तथा नीचे की कशेरुकाओं का संयोजन) शामिल हो सकता है।
इस प्रकार की सर्जरी के लिए सर्जन प्रायः कम से कम चीरे वाली आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं जिससे मरीज़ जल्दी ठीक होता है। बेशक, अगर सर्जरी ज़रूरी हुई तो हम सर्जरी से पूर्व ही आपको पूरी प्रक्रिया स्पष्ट रूप से समझायेंगे। ठीक (स्वस्थ) होना यों तो लम्बर DDD बढ़ती उम्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है, पर इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको पीठ के दर्द के साथ ही जीना पड़ेगा। हम आपकी स्वस्थ, दर्द मुक्त और सक्रिय जीवन जीने में मदद कर सकते हैं। अधिकतर मरीज़ों में ऐसा ग़ैर-ऑपरेशन इलाज से ही संभव हो जाता है। लेकिन अगर सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है, तो निश्चित रहें कि हम ऑपरेशन से जुड़े तमाम जोखिमों और फ़ायदों के बारे में आपसे चर्चा करेंगे और आपको हर संभव देखभाल उपलब्ध करायेंगे।
इन उपचारों के साथ-साथ, हमारे चिकित्साकर्मियों में मरीज़ों को शिक्षित करने की भी गहरी प्रतिबद्धता है। मरीज़ों को अपने रोग के कारणों को समझने में मदद देकर हम उन्हें रोग की आशंका कम करने और “रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ बनाये रखने वाली आदतें” डालने में भी मदद करते हैं। आपके हमारी देखरेख में रहने के दौरान, हमारे चिकित्साकर्मी आपको ठीक होने, जोखिम के कारण कम करने और स्वस्थ रहने के बारे में उत्तम जानकारी देंगे। संबंधित लिंक्स
फ़िज़िकल थेरेपी PLIF,ALIF और TLIF प्रक्रियायें कम से कम चीरे वाली स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) सर्जरी
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