


एम आर आई (MRI)
MRI क्या है? MRI स्कैन से बेहद व्यापक चित्र प्राप्त होते हैं, जिनसे कोमल ऊतकों के रोगों का पता आसानी से लगाया जा सकता है, CT स्कैन और एक्स-रे में ऐसा नहीं होता। MRI का एक और फ़ायदा यह है कि इसमें शरीर के अलग-अलग पहलुओं से चित्र प्राप्त होते हैं जिससे विभिन्न पहलुओं से शरीर रचना का अध्ययन संभव होता है।
MRI उपकरण तकनीशियन MRI मशीन को मरीज़ के पास के कमरे से संचालित करता है, जिसमें एक बड़ी खिड़की होती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान तकनीशियन मरीज़ को देख और उससे बातें कर सकता है। उपकरण को अलग कमरे से चलाना इसलिये ज़रूरी होता है ताकि कम्प्यूटर को शक्तिशाली चुंबकीय शक्ति से बचाया जा सके। जाँच-पूर्व तैयारी MRI के लिए किसी विशेष शारीरिक तैयारी की ज़रूरत नहीं होती। जाँच से पहले मरीज़ को अपने खान-पान पर रोक लगाने की भी ज़रूरत नहीं होती, जब तक कि कंट्रास्ट माध्यम (डाई) का प्रयोग न होना हो। अगर कंट्रास्ट एंजेट का प्रयोग होना हो, तो हर मरीज़ को जाँच-पूर्व व्यक्तिगत निर्देश दिये जाते हैं। जाँच से पूर्व मरीज़ से सभी गहने और धातु की वस्तुयें हटाने और चिकित्सा गाउन पहनने को कहा जाता है। कुछ मरीज़ MRI के योग्य पात्र नहीं होते। प्रतिबंधों में शामिल हैं:
प्रक्रिया के दौरान मरीज़ तकनीशियन से बातचीत कर सकते हैं। प्रक्रिया के दौरान भरोसा दिलाने के लिए एक व्यक्ति को मरीज़ के पास बैठने दिया जाता है। जाँच के दौरान मरीज़ को भरसक बिना हिले-डुले रहना चाहिए। इस जाँच में 30 मिनट से एक घंटा लगता है। निष्कर्ष
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