


स्पोंडिलोलिस्थीसिस – डीजेनेरेटिवस्पोंडिलोलिस्थीसिस, रीढ़ की हड्डी की बीमारी है, जिसमें एक कशेरुका, नीचे वाली कशेरुका के ऊपर खिसक आती है। डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस, सामान्यतः लम्बर स्पाइन, ख़ास तौर से L4-L5 में होती है। कशेरुकाओं की संरचना में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरूप कशेरुकाओं के बीच के जोड़ आगे खिसक आते हैं। इस प्रकार की स्पोंडिलोलिस्थीसिस बड़ी उम्र की महिला रोगियों में सबसे अधिक पाई जाती है, जो सामान्यतः 60 वर्ष से अधिक आयु की हों।
स्पोंडिलोलिस्थीसिस के कुछ रोगियों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और उन्हें बीमारी का पता तब चलता है जब वे स्वास्थ्य की किसी अन्य समस्या के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं। लेकिन, डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस के गंभीर मामलों में वर्टिब्रल बॉडी के आगे खिसकने से अक्सर स्पाइनल स्टेनोसिस, तंत्रिकाओं का दबना, दर्द और तंत्रिका-तंत्र को नुकसान हो सकता है। डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस क्यों होती है? निदान
स्पोंडिलोलिस्थीसिस का वर्गीकरण आम तौर पर, चिकित्सक स्लिप्स के वर्गीकरण के लिए मेयर्डिंग ग्रेडिंग सिस्टम का प्रयोग करते हैं। इस प्रणाली को समझना अपेक्षाकृत सरल है। फिसलाव का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि एक कशेरुका अपने नीचे वाली कशेरुका के ऊपर कितने प्रतिशत तक खिसक गई है। इस तरह प्रथम श्रेणी (ग्रेड I) स्लिप का मतलब है कि कशेरुका का 1-24% हिस्सा नीचे वाली कशेरुका के ऊपर से खिसक गया है। द्वितीय श्रेणी (ग्रेड II) से 25-49% खिसकने का पता चलता है। तृतीय श्रेणी (ग्रेड III) से 50-74% खिसकने का और चतुर्थ श्रेणी (ग्रेड IV) से 75-99% खिसकने का संकेत मिलता है। अगर कशेरुका नीचे वाली कशेरुका के ऊपर से पूरी तरह खिसककर अलग हो चुकी है तो उसे पाँचवीं श्रेणी (ग्रेड V) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, और इसे स्पोंडिलोलिस्थीसिस कहा जाता है। ग़ैर-ऑपरेशन उपचार डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस प्रोग्रेसिव हो सकती है - यानी कि समय के साथ इससे होने वाला नुकसान बढ़ता जायेगा। इसके अलावा, डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस से स्टेनोसिस भी हो सकती है, जिसमें स्पाइनल कैनाल संकुचित हो जाती है और सुषुम्ना दबने लगती है। यदि स्टेनोसिस गंभीर है और सभी ग़ैर-ऑपरेशन इलाज विफल रहे हैं, तो सर्जरी आवश्यक हो जाती है। सर्जिकल उपचार स्पोंडिलोलिस्थीसिस के इलाज में काम आने वाली सबसे आम सर्जिकल प्रक्रिया है लैमिनेक्टॉमी और संयोजन । इस प्रक्रिया में, कशेरुका की छत (लैमीनी) को हटाकर या काट-छाँटकर स्पाइनल कैनाल को चौड़ा किया जाता है। यह तंत्रिकाओं के लिए अधिक जगह बनाने और सुषुम्ना पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए किया जाता है। हो सकता है कि सर्जन को कशेरुकाओं को आपस में संयोजित करने की भी ज़रूरत पड़े। यदि संयोजन किया जाता है, तो विभिन्न उपकरण (जैसे पेंच या पिंजरे) भी इम्प्लांट किये जा सकते हैं ताकि संयोजन को बढ़ावा और अस्थिर रीढ़ को सहारा मिले। डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस के मामले का उदाहरण
इस 58 वर्षीय महिला को L4/L5 स्तर की डीजेनेरेटिव स्पोंडिलोलिस्थीसिस थी, जैसा कि एक्स-रे और MRI से स्पष्ट है। उन्हें दूर तक चलने में कठिनाई होती थी और पीठ तथा टाँगों में दर्द रहता था। इसका लैमिनेक्टॉमी और इंस्ट्रुमेंटेशन सहित फ़्यूज़न से इलाज किया गया (इस ऑपरेशन के विवरण के लिए PLIF, ALIF, और TLIF पर लेख देखें)। निष्कर्ष
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